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HANUMAN CHALISA LYRICS – हनुमान चालीसा

HANUMAN CHALISA LYRICS - हनुमान चालीसा

Hanuman Chalisa lyrics महान कवि तुलसीदास जी द्वारा रचित एक भजन है जो हनुमान जी को समर्पित है। इसमे तुलसीदास जी द्वारा भगवान हनुमान जी का गुणगान करते हुये 40 चोपई लिखी गयी हैं।

इसी  लिए इसका नाम हनुमान चालीसा है। हनुमान चालीसा गाने या सुनने मात्र से ही सारी दुख व बाधाएं दूर हो जाती हैं और श्री हनुमान जी का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

इस स्तुति में भगवान श्री हनुमान जी की पूजा करते हुए  उनका गुणगान किया गया है । 

इस पोस्ट के माध्यम हम आपको इस भजन का हिन्दी में भावार्थ समझाएँगे। लेकिन उस से पहले एक बार भजन का मूल रूप देख लें । 

Hanuman Chalisa LYRICS

दोहा :

श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि।
बरनऊं रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि।।

बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।
बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।।

चौपाई :

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुं लोक उजागर।। 

रामदूत अतुलित बल धामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।।

महाबीर बिक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी।।

कंचन बरन बिराज सुबेसा। कानन कुंडल कुंचित केसा।।

हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै। कांधे मूंज जनेऊ साजै।

संकर सुवन केसरीनंदन। तेज प्रताप महा जग बन्दन।।

विद्यावान गुनी अति चातुर। राम काज करिबे को आतुर।।

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया। राम लखन सीता मन बसिया।।

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा। बिकट रूप धरि लंक जरावा।।

भीम रूप धरि असुर संहारे। रामचंद्र के काज संवारे।।

लाय सजीवन लखन जियाये। श्रीरघुबीर हरषि उर लाये।।

रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई। तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।।

सहस बदन तुम्हरो जस गावैं। अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं।।

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा। नारद सारद सहित अहीसा।।

जम कुबेर दिगपाल जहां ते। कबि कोबिद कहि सके कहां ते।।

तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा। राम मिलाय राज पद दीन्हा।।

तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना। लंकेस्वर भए सब जग जाना।।

जुग सहस्र जोजन पर भानू। लील्यो ताहि मधुर फल जानू।।

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं। जलधि लांघि गये अचरज नाहीं।।

दुर्गम काज जगत के जेते। सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।।

राम दुआरे तुम रखवारे। होत न आज्ञा बिनु पैसारे।।

सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डर ना।।

आपन तेज सम्हारो आपै। तीनों लोक हांक तें कांपै।।

भूत पिसाच निकट नहिं आवै। महाबीर जब नाम सुनावै।।

नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरंतर हनुमत बीरा।।

संकट तें हनुमान छुड़ावै। मन क्रम बचन ध्यान जो लावै।।

सब पर राम तपस्वी राजा। तिन के काज सकल तुम साजा।

और मनोरथ जो कोई लावै। सोइ अमित जीवन फल पावै।।

चारों जुग परताप तुम्हारा। है परसिद्ध जगत उजियारा।।

साधु-संत के तुम रखवारे। असुर निकंदन राम दुलारे।।

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता। अस बर दीन जानकी माता।।

राम रसायन तुम्हरे पासा। सदा रहो रघुपति के दासा।।

तुम्हरे भजन राम को पावै। जनम-जनम के दुख बिसरावै।।

अन्तकाल रघुबर पुर जाई। जहां जन्म हरि-भक्त कहाई।।

और देवता चित्त न धरई। हनुमत सेइ सर्ब सुख करई।।

संकट कटै मिटै सब पीरा। जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।।

जै जै जै हनुमान गोसाईं। कृपा करहु गुरुदेव की नाईं।।

जो सत बार पाठ कर कोई। छूटहि बंदि महा सुख होई।।

जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा। होय सिद्धि साखी गौरीसा।।

तुलसीदास सदा हरि चेरा। कीजै नाथ हृदय मंह डेरा।।

दोहा :

पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप।।

Hanuman Chalisa LYRICS Meaning In Hindi

श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि ।
बरनऊं रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि ।।

श्रीगुरु चरन सरोज रज,” का अर्थ :

तुलसीदास जी इस दोहे के द्वारा ये कह रहे हैं की अपने गुरु के चरण कमलों की धूल से अपने हृदय के दर्पण को साफ करने के बाद, मैं रघुकुल राजवंश के सबसे बड़े राजा राम की दिव्य प्रसिद्धि का पाठ करता हूं, जो हमें चारों पुरुषार्थ जैसे धर्म, अर्थ, काम व मोक्ष के फल देते हैं।

बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार ।
बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार ।।

“बुद्धिहीन तनु जानिके” का अर्थ :

मैं ये जनता हूँ की मेरी बुद्धि व बल कम है।  मैं पवन पुत्र हनुमान जी का ध्यान करता हूँ जो मुझे बल, बुद्धि और सभी विद्याएँ देकर मेरे सभी कष्टों और कमियों दूर करते हैं।

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर । जय कपीस तिहुं लोक उजागर ॥ 
रामदूत अतुलित बलधामा । अंजनि-पुत्र पवनसुतनामा ॥

“जय हनुमान ज्ञान गुन सागर” का अर्थ :

ज्ञान के सागर ,हनुमान जी आपकी जय हो, हे वानर श्रेष्ठ! आपकी प्रसिद्धि तीनों लोकों में फैली हुयी है।

आप भगवान राम जी की दूत हैं जो की बहुत बलवान हैं। आप माता अंजनी के पुत्र हैं और पवनपुत्र नाम से प्रसिद्ध हैं

महाबीर बिक्रम बजरंगी । कुमति निवार सुमति के संगी ।।
कंचन बरन बिराज सुबेसा । कानन कुंडल कुंचित केसा ।।

“महाबीर बिक्रम बजरंगी” का अर्थ :

महावीर बजरंग बली आप बहुत पराक्रमी हैं। आप हमारी कुमति को दूर कर देते हो और अच्छी मति वालों का हमेसा साथ देते हो।

आपके शरीर का रंग सुनहरा है और आपने सुन्दर कपड़े पहने हुये हैं। आपके कानों में कुण्डल हैं और आपके बाल घुंघराले हैं।

हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै । कांधे मूंज जनेऊ साजै ।।
संकर सुवन केसरीनंदन । तेज प्रताप महा जग बन्दन ।।

“हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै” का अर्थ :

आपके हाथों में, एक गदा और धार्मिकता का झंडा चमकता है। एक जनेऊ (पवित्र धागा) आपके दाहिने कंधे को सुशोभित करता है।

आप भगवान शिव के अवतार हैं और वानरों के राजा केसरी के पुत्र हैं। आपकी महिमा, आपकी भव्यता की कोई सीमा नहीं है। पूरा ब्रह्मांड आपकी पूजा करता है।

विद्यावान गुनी अति चातुर । राम काज करिबे को आतुर ।।
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया । राम लखन सीता मन बसिया ।।

“विद्यावान गुनी अति चातुर” का अर्थ :

आप बुद्धिमान, गुणी और (नैतिक रूप से) सबसे चतुर हैं। आप हमेशा भगवान राम के कार्यों को करने के लिए उत्सुक रहते हैं।

भगवान राम की करनी और आचरण को सुनकर आप बेहद प्रसन्न महसूस करते हैं। भगवान राम, माता सीता और भगवान लक्ष्मण आपके दिल में हमेशा के लिए बसते हैं।

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा । बिकट रूप धरि लंक जरावा ।।
भीम रूप धरि असुर संहारे । रामचंद्र के काज संवारे ।।

“सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा” का अर्थ :

सूक्ष्म रूप लेते हुए, आप माता सीता के सामने प्रकट हुए। और भयानक रूप लेते हुए, आपने लंका (रावण का साम्राज्य) को जला दिया।

विशालकाय रूप लेते हुए (जैसे कि भीम), आपने राक्षसों का वध किया। इस तरह, आपने भगवान राम के कार्यों को सफलतापूर्वक पूरा किया।

लाय सजीवन लखन जियाये । श्रीरघुबीर हरषि उर लाये ।।
रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई । तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई ।।

“लाय सजीवन लखन जियाये” का अर्थ :

संजीवनी बूटी लाकर, आपने भगवान लक्ष्मण को पुनर्जीवित किया।

रघुपति, भगवान राम ने आपकी बहुत प्रशंसा की और आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मेरे प्रिय भाई भरत के जैसे ही आप मेरे प्रिय हैं

सहस बदन तुम्हरो जस गावैं । अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं ।।
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा । नारद सारद सहित अहीसा ।।

“सहस बदन तुम्हरो जस गावैं” का अर्थ :

भगवान श्री राम ने यह कहते हुये आपको ह्रदय से लगाया की हजारों मुख वाले शेषनाग तुम्हारे यश का गान करेंगे ।

सनक, सनन्दन, सनातन, और सनत्कुमार आदि ऋषि, मुनि, ब्रह्मा जी, नारद जी, माँ शारदा और शेषनाग भी आपकी प्रसिद्धि का गान करते हैं

जम कुबेर दिगपाल जहां ते । कबि कोबिद कहि सके कहां ते ।।
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा । राम मिलाय राज पद दीन्हा ।।

“जम कुबेर दिगपाल जहां ते” का अर्थ :

यम, कुबेर और दिग्पाल (चार पहर के रक्षक), कवि और विद्वान – कोई भी आपकी महिमा को व्यक्त नहीं कर सकता।

आपने वानर राज सुग्रीव को श्री राम से मिलाया तथा उनका राज्य वापस दिलाकर उनपर उपकार किया।

तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना । लंकेस्वर भए सब जग जाना ।।
जुग सहस्र जोजन पर भानू । लील्यो ताहि मधुर फल जानू ।।

“तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना” का अर्थ :

इसी तरह आपके उपदेशों का अनुपालन करते हुए विभीषण भी लंका के राजा बन गए।

बचपन मेन आपने हजारों मील दूर स्थित सूर्य को एक मीठा, लाल फल समझ कर निगल लिया।

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं । जलधि लांघि गये अचरज नाहीं ।।
दुर्गम काज जगत के जेते । सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते ।।

“प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं” का अर्थ :

भगवान राम द्वारा दी गई अंगूठी को अपने मुंह में रखते हुए, आप समुद्र के पार चले गए आपके लिए ये कोई आश्चर्य करने वाली बात नहीं है। 

आपकी कृपा से इस दुनिया के सभी कठिन कार्य आसान हो जाते हैं।

राम दुआरे तुम रखवारे । होत न आज्ञा बिनु पैसारे ।।
सब सुख लहै तुम्हारी सरना । तुम रक्षक काहू को डर ना ।।

“राम दुआरे तुम रखवारे” का अर्थ :

आप भगवान राम के द्वार पर संरक्षक हैं। आपकी अनुमति के बिना कोई भी आगे नहीं बढ़ सकता है जिसका अर्थ है कि भगवान राम के दर्शन (उनकी दृष्टि पाने के लिए) केवल आपकी आज्ञा से संभव हैं।

जो आप में शरण लेते हैं, वे सभी सुख और आनंद पाते हैं। जब हमारे पास आप जैसा रक्षक होता है, तो हमें किसी से या किसी चीज से डरने की जरूरत नहीं है।

आपन तेज सम्हारो आपै । तीनों लोक हांक तें कांपै ।।
भूत पिसाच निकट नहिं आवै । महाबीर जब नाम सुनावै ।।

“आपन तेज सम्हारो आपै” का अर्थ :

आपकी शक्ति को सिर्फ आप ही संभाल सकते हैं आपकी एक हुंकार से तीनों लोक काँप उठाते हैं।

हे महावीर! बस आपका नाम लेने मात्र भर से ही कोई भी भूत या बुरी आत्माएं पास नहीं आती हैं।

नासै रोग हरै सब पीरा । जपत निरंतर हनुमत बीरा ।।
संकट तें हनुमान छुड़ावै । मन क्रम बचन ध्यान जो लावै ।।

“नासै रोग हरै सब पीरा” का अर्थ :

हे हनुमान! सभी रोगों और सभी प्रकार के दर्द मिट जाते हैं जब कोई आपका नाम जपता है। इसलिए, नियमित रूप से आपका नाम जप बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है।

जो कोई भी मन, वचन और कर्म से आप का ध्यान करता है उसे सभी प्रकार के संकटों और विपत्तियों से मुक्ति मिलती है।

सब पर राम तपस्वी राजा । तिन के काज सकल तुम साजा ।।
और मनोरथ जो कोई लावै । सोइ अमित जीवन फल पावै ।।

“सब पर राम तपस्वी राजा” का अर्थ :

भगवान राम सभी राजाओं में सबसे बड़े तपस्वी हैं। लेकिन, यह केवल आप ही हैं जिन्होंने भगवान श्री राम के सभी कार्यों को अंजाम दिया।

जो किसी भी लालसा या ईमानदारी की इच्छा के साथ आपके पास आता है, वह जीवन भर न मिटने वाला फल प्राप्त करता है।

चारों जुग परताप तुम्हारा । है परसिद्ध जगत उजियारा ।।
साधु-संत के तुम रखवारे । असुर निकंदन राम दुलारे ।।

“चारों जुग परताप तुम्हारा” का अर्थ :

आपके प्रताप का यश चारों युगों में फैला हुआ है और आपका प्रकाश सम्पूर्ण जगत में प्रसिद्ध है।

आप सभी साधु और संतों के रखवाले (रक्षा करने वाले) ,असुरों का संहार करने वाले और श्री राम भगवान के प्रिय भक्त हो।

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता । अस बर दीन जानकी माता ।।
राम रसायन तुम्हरे पासा । सदा रहो रघुपति के दासा ।।

“अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता” का अर्थ :

माता जानकी ने आपको वरदान दिया है कि आप आठ अलग-अलग शक्तियों और नौ विभिन्न प्रकार के धन को वरदान के रूप में भक्तों को प्रदान कर सकते हैं।

आपके पास राम भक्ति का सार है इसलिए आप हमेशा रघुपति के विनम्र और समर्पित सेवक बने रहते हैं।

तुम्हरे भजन राम को पावै । जनम-जनम के दुख बिसरावै ।।
अन्तकाल रघुबर पुर जाई । जहां जन्म हरि-भक्त कहाई ।।

“तुम्हरे भजन राम को पावै” का अर्थ :

जब कोई आपकी प्रशंसा, आपका नाम गाता है, तो वह भगवान राम से मिलता है और कई जन्मों के दुखों से राहत पाता है।

आपकी कृपा से हम मृत्यु के बाद भगवान राम के धाम पर जाएंगे और राम भक्त कहलाएंगे ।

और देवता चित्त न धरई । हनुमत सेइ सर्ब सुख करई ।।
संकट कटै मिटै सब पीरा । जो सुमिरै हनुमत बलबीरा ।।

“और देवता चित्त न धरई” का अर्थ :

किसी अन्य देवता या भगवान की सेवा करने की आवश्यकता नहीं है। भगवान हनुमान को सेवा सभी सुख देती है।

जो शक्तिशाली भगवान हनुमान को याद करता है उसकी सभी परेशानियों समाप्त हो जाती हैं और उसके सभी कष्ट भी दूर हो जाते हैं।

जै जै जै हनुमान गोसाईं । कृपा करहु गुरुदेव की नाईं ।।
जो सत बार पाठ कर कोई । छूटहि बंदि महा सुख होई ।।

“जै जै जै हनुमान गोसाईं” का अर्थ :

हे हनुमान जी आपकी जय हो। आप मुझ पर गुरु के समान कृपा बनाये रखें।

जो इस चालीसा का सौ बार पाठ करता है, वह सभी बंधनों से मुक्त हो जाता है और उसे अत्यधिक आनंद की प्राप्ति होती है।

जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा । होय सिद्धि साखी गौरीसा ।।
तुलसीदास सदा हरि चेरा । कीजै नाथ हृदय मंह डेरा ।।

“जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा” का अर्थ :

जो इस हनुमान चालीसा का पाठ करता है, उसके सभी कार्य सिद्ध हो जाते हैं। स्वयं भगवान शिव इसके साक्षी हैं।

हनुमान जी मैं तुलसीदास सदा प्रभु श्री राम का दास रहूँ और आप मेरे ह्रदय में निवास करें।

पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप ।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप ।।

“पवन तनय संकट हरन” का अर्थ :

हे पवन पुत्र, आप सभी दुखों का नाश करने वाले हो। आप भाग्य और समृद्धि के अवतार हैं।

भगवान राम, लक्ष्मण और माता सीता के साथ, आप हमेशा मेरे दिल में बसते हैं।

HANUMAN CHALISA LYRICS के बारे में कुछ और बातें

हनुमान चालीसा का पाठ कब करना चाहिए? :

हनुमान चालीसा का पाठ पूरे विधि विधान से करने पर हनुमान जी प्रसन्न होते हैं तथा जल्दी ही सुभ फल प्राप्त होता है।

आप मंगलवार और शनिवार को Hanuman Chalisa का पाठ कर सकते हैं। सुबह जल्दी उठकर स्नान तथा नित्यकर्म के बाद ही हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए। पाठ करते समय अपने सामने हनुमान जी की मूर्ति या चित्र रखनी चाहिए। मूर्ति या चित्र न होने पर आप आँखें बंद करके हनुमान जी का ध्यान कर सकते हैं।  

हनुमान चालीसा दिन में कितनी बार पढ़ना चाहिए? :

हो सके तो आप रोज भी हनुमान चालीसा का पाठ कर सकते हैं। अगर रोज पाठ न कर सको तो मंगलवार और शनिवार को हनुमान चालीसा का पाठ जरूर करना चाहिए। Hanuman Chalisa की एक पंक्ति में लिखा है की “जो सत बार पाठ कर कोई। छूटहि बंदि महा सुख होई।।, मतलब जो हनुमान चालीसा का पाठ 100 बार कर लेगा वो सारे बंधनों से मुक्त हो जाएगा।

लेकिन 100 बार संभव न हो तो 1 बार भी आप पूरी श्रद्धा व ध्यानपूर्वक हनुमान चालीसा का पाठ कर सकते हैं उससे अधिक 3,5,7,11,21,31,51,100 । नियमित रूप से प्रतिदिन एक बार भी श्रद्धा पूर्वक करेंगे तो लाभ होगा।

हनुमान चालीसा 7 बार पढ़ने से क्या होता है? :

वैसे तो हनुमान चालीसा का पाठ रोज ही या मंगलवार या शनिवार को कर सकते हैं। लेकिन अगर कोई लगातार 7 दिनों तक सुबह जल्दी उठकर स्नान तथा नित्यकर्म के बाद उगते हुए सूर्य या भगवान राम जी के चित्र के सामने Hanuman Chalisa lyrics का पाठ करें तो उसकी सारी मनोकामनाएं पूरी हो जाती है तथा सारे कष्टों का निवारण हो जाता है

हनुमान चालीसा में कितनी चौपाई है? :

हनुमान चालीसा की शुरुआत दो दोहे से होती है। हनुमान चालीसा की पहली 10 चौपाई में उनके शक्ति और ज्ञान का वर्णन किया गया है। अगली 11 से 20 तक के चौपाई में भगवान राम की महिमा का वर्णन किया गया है। आखिरी की चौपाइयों में तुलसीदास जी ने हनुमान जी की महिमा का गुणगान किया है। सम्पूर्ण Hanuman Chalisa lyrics में 3 दोहों के साथ 40 चौपाई हैं।

हनुमान चालीसा का फल क्यों नहीं मिलता? :

वैसे तो Hanuman Chalisa lyrics का नित्य पाठ सच्चे मन ओर ध्यान के साथ करने से बजरंगबली प्रसन्न हो जाते हैं लेकिन कुछ नियमों का ध्यान न रखने से हनुमान चालीसा का फल नहीं मिलता है-
1. हनुमान चालीसा का पाठ हमेशा कुश या ऊन के आसन पर ही बैठकर ही करना चाहिए। कुछ लोग जमीन पर बैठकर ही चालीसा का पाठ करने लग जाते हैं जो कि शास्त्रों के अनुसार वर्जित है।

2.पाठ के दौरान रजस्वला महिला का स्पर्श नहीं करना चाहिए। हनुमान जी ब्रह्मचारी हैं और रजस्वला महिला का साया उनकी पूजा के फल को कम कर सकता है।

3.हनुमान जी को लाल रंग सबसे प्रिय है इसलिए हनुमान चालीसा का पाठ करते वक्त लाल वस्त्र धारण करने चाहिए।

4.हनुमान चालीसा का पाठ करते समय अपने मन में किसी के प्रति बैर नहीं रखना चाहिए।

5. हनुमान चालीसा का पाठ करते समय सबसे पहले श्रीराम जी का ध्यान करना चाहिए। क्योंकि श्रीराम हनुमान जी के आराध्य हैं।

6.अगर आप हनुमान जी की कृपा पाना चाहते हैं तो आपको मांसाहार का सेवन छोड़ देना चाहिए। अगर आप मांसाहार का सेवन नहीं छोड़ सकते हैं तो कम से कम मंगलवार और शनिवार को मांसाहार का सेवन न करें। हनुमान जी ब्रह्मचारी होने के साथ ही सात्विक भी हैं इसलिए हो सके तो मांसाहार को छोड़ ही दें अन्यथा पाठ करने से फायदे की जगह नुकसान हो सकता है।

क्या लड़कियां हनुमान चालीसा पढ़ सकती है? ( क्या लड़कियां मंगलवार का व्रत कर सकती है?) :

हिन्दू धर्म में किसी भी देवी देवता की पूजा का अधिकार स्त्रियों तथा पुरुषों सभी को एक समान होता है। लेकिन हनुमान जी की पूजा में स्त्रियों के लिए कुछ नियम हैं। क्योंकि हनुमान जी ब्रह्मचारी थे इस वजह से स्त्रियों के लिए हनुमान जी की पुजा के लिए कुछ नियम हैं।
वैसे तो हनुमान जी के लिए सभी महिलाएं माता समान हैं वो नहीं चहते की कोई स्त्री उनके आगे झुके। इसलिए उनकी पूजा में कुछ ऐसे कार्य है जिन्हें स्त्रियों को नहीं करना चाहिए । महिलाएं Hanuman Chalisa lyrics, संकट मोचन, हनुमानाष्टक, सुंदरकांड आदि का पाठ कर सकती हैं।
लेकिन महिलाओं को बजरंग बाण का पाठ नहीं करना चाहिए। तथा महिलाएं रजस्वला होने पर हनुमान जी से संबंधित कोई भी कार्य न करें।

रोज हनुमान चालीसा पढ़ने से क्या होता है?( हनुमान चालीसा पढ़ने से क्या लाभ होता है? ) :

अगर कभी भी आपका मन अशांत हो या किसी चीज का भय हो तो Hanuman Chalisa lyrics का पाठ करना चाहिए। आपका मन शांत होगा और आपके सभी भय दूर हो जाएंगे। हनुमान चालीसा का पाठ करने से शनि और मंगल ग्रह संबन्धित दोष दूर हो जाते हैं। हनुमान चालीसा का पाठ करने से सकारात्मक सोच विकसित होती है। व आपकी मनोकामनाएँ पूर्ण हो जाती हैं साथ ही आपका मनोबल भी बढ़ता है।

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