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Lakadhare Ki Kahani – लकड़हारे की कहानी

Lakadhare Ki Kahani - लकड़हारे की कहानी

Lakadhare Ki Kahani

लकड़हारे की कहानी

दूर एक गाँव में एक लकड़हारा रहता था । जो लकड़ियाँ बेचकर ही अपना पेट पालता था। लकडहारे के पास एक अनौखी शक्ति थी । वो जो भी सपना देखता वो हमेसा सच हो जाता । उसने अपनी इस शक्ति के बारे मे सब से छुपा कर रखा था ।

एक रात उसने सपना देखा की जहां वो लकड़ी बेचने जाता है वहाँ भुकंप आ गया है और सारे लोग डर के मारे इधर-उधर भाग रहे हैं।

रोज की तरह लकड़हारा जब सुबह लकड़ी काटने गया तो एक आदमी ने उस से कहा , “भाई तुम जहां लकड़ी बेचने जाते हो आज सुबह-सुबह वहाँ भुकंप आया और लोगों में हड़कंप मच गया । तूम आज वहाँ मत जाना ।”

उसके ऐसा बोलने पर लकड़हारे को वो सपना याद आ गया जो उसने पिछली रात को देखा था । लकड़हारा  उसे अपने सपने के बारे में बिना कुछ भी बताए अपने घर चला गया ।

अगली रात उस लकड़हारे ने फिर एक सपना देखा । इस बार सपने में परी लोक की महारानी के गले का हार चोरी हो गया है। अगली सुबह जब लकड़हारा लकड़ियाँ काटने जाने लगा तो रास्ते में उसे एक आदमी मिला, जिसने उससे किसी योग्य लकड़हारे का पता पूछा ।

लकड़हारे ने कहा ,”मैं भी एक लकड़हारा ही हूँ बताओ क्या काम है?”

“मैं परीलोक का सेनापति हूँ  परी लोक के राजा को एक लकड़हारे की जरूरत है, क्या तुम मेरे साथ परी लोक चलोगे। ” सेनापति ने कहा ।

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लकड़हारे को काम की जरूरत थी तो वो परी लोक जाने को राजी हो गया ।

लकड़हारा  जैसे ही राजमहल के बड़े से दरवाजे के पास पहुंचा, तो देखा की महल में शोर हो रहा है, लकड़हारा ने पहरेदार से शोर का कारण पूछा ,पहरेदार ने  लकड़हारे को बताया की कल रात महारानी का हार चोरी हो गया है।

 उसी रात लकड़हारे ने सपने में महारानी की दासी को देखा । सपने में दासी अपने पति को उस हार को दूर शहर में बेच आने को कह रही है । जब लकड़हारे की नींद खुली, तो वो तुरंत राजा के महल में गया और राजा को बताया की आपके दास-दासियों ने ही हार चुराया है।

राजा ने राजमहल के सभी दास और दासियों को बुलाया । जैसे ही लकड़हारे ने उस दासी को देखा जो उसके सपने में आई थी तो वो उसे पहचान गया । उसने राजा को बताया की ये दासी ओर इसका पति चोर है। अपने ऊपर आरोप लगता देख  वो दासी रोने लग गयी ।

दासी को रोता देख रानी को उसपर दया आ गयी । रानी ने गुस्से से कहा, “तुम्हारी हिम्मत कैसे हुयी मेरी खास दासी पर आरोप लगाने की, ये आदमी झुठा है इसे अभी कारागार में बंद कर दिया जाय । लकड़हारा डर गया और रानी से कहने लगा,

” महारानी आपके इसी भरोशे का इस दासी और इसके पति ने गलत फायदा उठाया है। “

राजा व रानी ने लकड़हरे की बात पे भरोसा न करते हुये उसे कारागार में बंद कर दिया।

लकड़हारा अपने साथ अन्याय होता देख खुद से कहने लगा, भलाई करने गया था क्या से क्या हो गया ।

कारागार के बाहर उसे वही सेनापति मिला । सेनापति ने कहा, “अगर तुम सच्चे हो तो मैं तुम्हारी मदद कर सकता हूँ ।”

“सेनापति जी मैं निर्दोष हूँ, मेरी मदद करो ।” लकड़हरे ने कहा ।

सेनापति ने उसे परी लोक की देवी के बारे में बताया, वो सिर्फ सच्चे इन्सानों की मदद करती है, “अगर तुम सच्चे होगे तो वो जरूर  तुम्हारी मदद को आएगी।” सेनापति ने कहा ।

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लकड़हारा आंखे बंद करके परी को याद करने लगा। कुछ ही देर में उसके सामने एक सुंदर सी परी काले कपड़े पहने खड़ी थी । परी के हाथ में एक झाड़ू था

“तुम कोन  हो, तुमने मुझे क्यों याद किया।” परी ने लकड़हारे से कहा । लकड़हारे ने परी को सारी बात सुनाई की कैसे वो परी लोक में फस गया । परी ने कहा ,” की मैं तुम्हें ये एक जादुई झाड़ू देती  हूँ। बाकी तुम अपना दिमाग लगाओ की राजा के सामने तुम कैसे असली चोर को पकडवाओगे।” ऐसा कह कर परी गायब हो गयी ।

अब लकड़हारे के पास परी का जादुई झाडू था । ये परी का जादुई झाडू ही अब उसकी कुछ मदद कर सकता था ।       

 सेनापति  ने लकड़हारे से कहा , “सारे चोर रात के अंधेरे में ही चोरी का माल दूसरे राज्य में ले जाते हैं , मेरे पास एक उपाय है । अब हमारे पास परी का जादुई झाडू है जिस की मदद से हम दोनों इसमे बैठ कर उस चोर को पकड़ सकते हैं ।”

वो दोनों झाड़ू में बैठ कर आकाश में उड़ गये , और महल के चारो ओर नजर रखने लगे । लेकिन उस रात उन्हें  कोई भी चोर नहीं मिला ।

अगली रात को वो दोनों चोर को ढूंढने के लिए फिर से उस जादुई झाड़ू में बेठ कर उड़ गए । तभी उनको एक आदमी दिखाई दिया । जो हाथ मे गठरी लिए अंधेरे में  छुप- छुप कर महल के बाहर जा रहा था । दोनों ने बहुत दूर तक उसका पीछा किया , पीछा करते-करते सवेरा हो गया ।

सुबह होते ही लकड़हारे ने उस चोर को पहचान लिया । और सेनापति  को बताया की ये तो वही चोर है जिसने चोरी की है। सेनापति ने उस चोर को दबोच लिया और जादुई झाड़ू में बैठा कर सीधे राजमहल मे पहुच गये ।

 जब परी का जादुई झाडू लोगों ने देखा तो राज दरबार के सभी लोग हैरान हो गए । सबको यकीन हो गया की लकड़हारा सच्चा है, क्योंकि परी का जादुई झाडू सिर्फ एक सच्चा  इंसान ही प्राप्त कर सकता था ।

जब गठरी को खोला गया तो उसमे रानी का हार मिला । राजा ने दासी ओर उसके पति को कारागार में डालने के आदेश दिये। राजा ने लकड़हारे की सच्चाई से खुश हो कर उसे राज्य का विशेष सलाहकार बना दिया ।

 

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