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Sher Aur Hiran Ki Kahani – शेर और हिरन की दोस्ती

Sher aur Hiran Ki Kahani

Sher Aur Hiran Ki Kahani

Hindi Story For Kids – शेर और हिरन की दोस्ती

घने जंगल में सन्नाटा छाया हुआ था। सारे पशु पक्षी सोए हुए थे। बस शिकारी जानवर जैसे भेड़िया, शेर ,लकड़बग्घा आदि जागे हुए थे। शेर शिकार करने के लिए झड़ियों के पीछे घात लगा कर बैठा हुआ था।

उसे हिरन का परिवार दिख गया था। जो अपने झुंड में सो रहा था। हिरन के झुंड को जैसे ही किसी की आहट सुनाई दी हिरन का झुंड भागने लगा। इतने में शेर झड़ियों से बाहर निकाल कर झुंड का पीछा करने लगा।

शेर जैसे ही एक हिरन के पास पहुंचने ही वाला था, वैसे ही हिरन दूसरी तरफ मुड़ गया। इस बार हिरन ने शेर को चकमा देकर अपनी जान बचा ली।

हिरन के परिवार को शेर से रोज-रोज जान बचानी पड़ती थी। एक दिन हिरन के परिवार ने फैसला किया कि अब वह इस जंगल को छोड़कर कहीं दूर चले जाएंगे।

एक लकड़बग्घा उनकी सारी बातें सुन रहा था। उसने जाकर यह सारी बात शेर को बता दी। शेर ने एक योजना बनाई और शैतानी हंसी देते हुए लकड़बग्घे से कहा की जब हिरन का परिवार दूसरे जंगल की ओर जाएगा तब वह उन पर हमला करेगा।

शेर चाहता तो हिरन के परिवार को छोड़ भी सकता था। उसके पास जंगल में बहुत सारे शिकार थे पर शेर हिरन परिवार के पीछे ही पड़ गया था क्योंकि हिरन परिवार के सबसे छोटे हिरन जिसका नाम चीनू था उसने शेर के बेटे की आंख अपने सींघों से फोड़ डाली थी। शेर उसी का बदला लेना चाहता था।

हिरन परिवार ने तय किया कि वह उस जंगल में कल तक भी नहीं रुकेंगे और आज दिन में ही दूसरे जंगल की तरफ निकलेंगे। हिरन परिवार ने दूसरे जंगल के बारे में सुना था कि वहां कोई शेर नहीं है वहां ऐसे जानवर रहते हैं जो शेर के जैसे हिंसक नहीं होते बल्कि बहुत आलसी होते हैं।

शेर को पता ही नहीं चल सका कि हिरन का परिवार जंगल छोड़कर चले गया है। शेर रात का इंतजार कर रहा था। पर हिरन का परिवार जंगल छोड़ कर जा चुका था।

शेर गुस्से से बौखला उठा उसने उस लकड़बग्घे को बुलाया और गरजते हुए पूछा की तुम तो कह रहे थे कि हिरन परिवार आज शाम को दूसरे जंगल को जाएगा पर यहां तो कोई है ही नहीं। लकड़बग्घा डर गया और बोला कि मैं अभी पता लगाकर आपको बताता हूं कि हिरन का परिवार कहां है।

लकड़बग्घा जंगल के जानवरों से पूछताछ करने लगा। उसे एक खरगोश मिला जो एक गाजर को कुतर-कुतर कर खा रहा था। उसने खरगोश से पूछा,

“अरे भाई तुमने चीनू को देखा।“ खरगोश बोला की मैं तो आज अपने लिए गाजर को ढूंढने में व्यस्त था। मैंने किसी को नहीं देखा, हां इस पेड़ के ऊपर बंदर रहते हैं हो सकता है उनमें से किसी ने उन्हें देखा हो।“

लकड़बग्घा बंदर की टोली के पास पहुंचा और उसने बंदरों से पूछा, “ तुमने किसी हिरन के परिवार को देखा क्या।“ एक बंदर बोला की हम तो खा पीकर सो जाया करते हैं। दिन में कोई कहीं भी जाए हमें कोई मतलब नहीं होता।“

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लकड़बग्घा सोचने लगा कि फालतू में शेर और उस हिरन की दुश्मनी में वह बीच में पड़ गया। लकड़बग्घा अब और आगे गया। उसे एक चिड़िया पानी के तालाब के पास मिली।

लकड़बग्घे ने सोचा कि यह चिड़ियां उसके काम आ सकती है तो उसने चिड़िया से कहा,

“बहन मेरा दोस्त मुझे बिना कुछ बताए कहीं चला गया है। मैं उसे सुबह से ढूंढ रहा हूं तुमने उसे देखा क्या?”

चिड़िया बोली, “नहीं मैंने तो किसी को नहीं देखा, कौन है तुम्हारा दोस्त?”

लकड़बग्घा बोला, “मेरे दोस्त का नाम चीनू है वो एक हिरन है, शायद वह पूरे परिवार के साथ कहीं चला गया है। मैं उसे ढूंढ रहा हूं।”

चिड़िया ने कहा, “तुम यहीं पर ठहरो मैं एक बार जाकर आसपास देख आती हूं, फिर मैं तुम्हें बताऊंगी।“

लकड़बग्घे की चाल कामयाब हो गई। चिड़िया उड़ते हुए आसमान से हिरन के परिवार को देख आई थी। वह परिवार जंगल से बहुत दूर पहुंच गया था।

चिड़िया लकड़बग्घे के पास आई और बोली की हिरन अपने परिवार के साथ शाम तक दूसरे जंगल तक पहुंच जाएगा।

अब लकड़बग्घा भाग कर शेर के पास गया और कहा, “जनाब हिरन का परिवार दूसरे जंगल को निकल गया है और शाम तक दूसरे जंगल पहुंच जाएगा।“

शेर लकड़बग्घे से बोला, “अगर मैं शिकार के लिए अभी से दूसरे जंगल को निकलता हूं तो आज रात तक मैं उस जंगल में पहुंच जाऊंगा।“ शेर ने दौड़ लगा दी।

वहीं हिरन का परिवार शाम होते-होते दूसरे जंगल में पहुंच गया। उन्होंने देखा यह जंगल सच में बड़ा सुंदर है। बड़े बड़े बांस के पेड़ हर जगह फैले हुए थे। दूर-दूर तक पेड़ ही पेड़ नजर आ रहे थे।

हिरन के सबसे छोटे बेटे चीनू ने वहां रंग बिरंगी हरे, नीले, पीले ,लाल और बैगनी रंग की तितलियां भी देखी। चीनू को बचपन से छोटी- छोटी और गोल-गोल चीजें बड़ी पसंद थी।

उसने अपने मम्मी पापा से कहा, “देखो-देखो कितना प्यारा जंगल है। चलो और आगे बढ़ते हैं। यहां हमारे रहने के लिए जरूर कोई जगह मिल जाएगी।“

हिरन का परिवार जैसे ही आगे निकला उन्होंने एक छोटे से गोल मटोल से जीव को देखा जो सफेद और काले रंग का था। उन्होंने ऐसा जानवर पहली बार ही देखा था।

उन्होंने रुक कर उसे देखा। वह बहुत मोटा सा था। जो बांस के पेड़ पर चढ़कर गुटर-गुटर कर उसे खा रहा था। चीनू उसे देख कर बड़ा ही खुश हुआ।

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चीनू उसके पास गया और उसने बोला, “हेलो मैं चीनू हूं, तुम्हारा क्या नाम है? तुम तो बड़े प्यारे लगते हो।“ उस जानवर ने कहा, “मेरा नाम पूह है मैं पांडा परिवार से हूं।“

“पांडा परिवार? तुम्हारा परिवार तो बहुत ही सुंदर लगता है,तुम मुझसे दोस्ती कर लो।“ चीनु ने कहा।

पूह ने कहा, ”हम लोग दोस्त नहीं बनाते, पर अगर तुम इस बांस को नीचे गिरा सको तो मैं तुम्हारा पक्का दोस्त बन जाऊंगा।“

चीनू ने अपने मजबूत सींघों से पूह के लिए बांस को नीचे गिरा दिया। पूह बड़ा ही खुश हुआ उसने कहा कि चीनू तुमने मेरे खाने का बड़ा अच्छा इंतजाम कर दिया है। तो चीनू ने उसे कहा, “क्या तुम इन बांस को खाते हो?”

तो पूह ने कहा, “हां मैं तो अभी छोटा हूं तो मैं बस 15 से 16 किलो ही खा पाता हूं, पर मेरे मम्मी पापा रोज 25 किलो बांस खा जाते हैं। तभी तो हम बांस के जंगल में ही रहते हैं।

यहां शेर लकड़बग्घा और खतरनाक जानवर नहीं है। क्योंकि बांस इतने बड़े और घने होते हैं कि शेर उनको पार करने की सोचता ही नहीं। पर हां कोई शेर आना भी चाहे तो उससे हमें कोई नुकसान नहीं है क्योंकि हम खुद शेर को भगा देते हैं।“

चीनु ने कहा, “हमें तो शेर के डर से ही उस जंगल को छोड़कर यहां आना पड़ा।“ पूह ने प्यार से कहा, “अरे तुम चिंता मत करो, अब तो तुम मेरे दोस्त हो। मैं और मेरा परिवार तुम्हारी हिफाजत करेंगे।“

अगले दिन शेर पीछा करते हुए इस जंगल में पहुँच गया। शेर पिछली रात से ही हिरन परिवार की खोज में था। उसे बदला जो लेना था। शेर को एक पांडा मिला । शेर उससे पूछा, “तुमने हिरन परिवार को देखा क्या?” तो उस पांडा ने कहा की उसने किसी हिरन को नहीं देखा है।

वह पांडा पूह ही था। फिर पूह ने जा कर चीनू के परिवार को बताया की शेर उनको ढूंड्ते हुये यहा तक पहुच गया है। चीनु के पापा ने पुह को शेर के बदले के बारे मे बताया। पुह ने उन्हें घने बांस में छुप जाने को कहा।

पूह फिर शेर के पास गया उसने शेर से कहा कि तुम हिरन परिवार को क्यों ढूंढ रहे हो। तब शेर ने कहा की मैं अपना बदला लेना चाहता हूं। हिरन के बेटे ने मेरे बेटे की आंख फोड़ डाली थी।

पूह ने शेर को समझाया कि देखिए बदला लेना कोई अच्छी बात नहीं है। हिरन का परिवार आपका कैसे कुछ बिगाड़ सकता है। आप तो बड़े ही ताकतवर जान पड़ते हो।

अगर हिरन का परिवार आपके जंगल से चले गया है तो यह आपके लिए बड़ा खुशी का मौका है क्योंकि आपके बेटे को अब उन्हें देखकर गुस्सा नहीं आएगा और आप तो जानते हैं कि हमें अच्छी आदतें डालनी चाहिए, दूसरों को माफ कर देना चाहिए।

आप हमारे जंगल से ऐसी दवाई ले जाइए जिससे आपके बेटे की आंख पूरी तरह ठीक हो जाएगी।

शेर ने कहा, “क्या ऐसी कोई दवाई होगी तुम्हारे पास?” पूह ने कहा, “हां है ना मैं अभी लेकर आता हूं।“

पूह एक पोटली ले आया उसने कहा, “इस पोटली में जो हरे रंग की पत्तियां होंगी उनको पीसकर उसका रस अपने बेटे की आंख में डालना और 3 दिन बाद आपके बेटे की आंखों की रोशनी वापस आ जाएगी। अपने बेटे से कहना कि यह दवा हिरन ने ही दी है।“

यह बात सुनकर शेर चौंक गया और बोला, “हिरन भला मेरे बेटे के लिए दवाई क्यों देगा? चीनु ने ही तो मेरे बेटे की आँख फोड़ी थी।“

पुह ने बताया की चीनु का परिवार अपनी गलती के लिए शर्मिंदा है। उन्होंने जानबुझ के आपके बेटे की आँख नहीं फोड़ी थी। वो तो चाहते हैं की आपके बेटे कि आँख जल्दी ठीक हो जाए इसलिए उन्होने ये दवाई भिजवाई है।

ये बात सुनकर शेर रो पड़ा और बोला, “चीनू की तो कोई गलती भी नहीं थी। मेरा बेटा ही उनको परेशान कर रहा था वह ही पेड़ से चीनू पर कूदा और चीनू का सींघ उसकी आंख में जा घुसा।“

पूह ने कहा, “मैं ये सब जानता हूं।“ तब शेर बोला, “क्या चीनू और उसका परिवार यहीं पर है।“ पूह ने कहा, “हाँ यहीं पर हैं।“ शेर ने रोते हुए कहा की जो भी मैंने उनके साथ किया में उसके लिए माफी मांगना चाहता हूं।“

चीनू शेर और पूह की बातें पेड़ के पीछे छुपकर सुन रहा था। चीनू सामने आया शेर ने उससे माफी मांगी और अपने जंगल चला गया। वहां पहुंचकर वह दवाई उसने अपने छोटे बेटे की आंखों में लगातार तीन दिन तक डाली।

जैसे ही चौथे दिन की सुबह हुई तो उसके बेटे की आंख ठीक हो गई। शेर ने अपने बेटे को सब बातें बता दी। फिर शेर के बेटे ने शेर से कहा, “मैं भी आपके साथ ही हिरन के परिवार और पांडा के परिवार से मिलने जाओंगा।”

फिर शेर अपने बेटे को अपने साथ दूसरे जंगल ले गया। शेर पूह और पांडा से मिला और कहा कि हम अब तुम्हारे साथ खेलने हर महीने इस जंगल में आएंगे और शेर का बेटा जिसका नाम शेरू था उसके दो दोस्त पूह और चीनू बन गए।

Sher aur Hiran Ki Kahani से हमने क्या सीखा:

Sher aur Hiran Ki Kahani से हमें यह सीख मिलती है कि हमेसा दूसरों का भला करना चाहिए। भलाई से ही हम दूसरों का दिल जीत सकते हैं।  

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