Dadu Tales

Tenali Rama Short Story – परियों का नृत्य

Tenali Rama Short Story - परियों का नृत्य

Tenali Rama Short Story

तेनालीरामा की कहानी : परियों का नृत्य

एक बार रूपसेतु नाम का एक व्यक्ति राजा कृष्णदेव राय के राजदरबार में आया। वह काफी दुबला-पतला सा था। वह दरबार में पहुंचा और राजा कृष्णदेव राय से बताया कि वह रूपदेश से आया है और वह दुनिया के भ्रमण हेतु निकला है।

रूपसेतु ने राजा से कहा की कई जगह घूमने के बाद वह राजा के दरबार में पहुंचा है। रूपसेतु के मुख से यह सुनकर राजा कृष्णदेव राय बहुत खुश हुए। तब राजा ने एक विशेष अतिथि के रूप में उसका आदर सत्कार किया।

रूपसेतु को राजा द्वारा सम्मान और आतिथ्य देखकर बहुत खुशी हुई। उसने राजा से कहा, “महाराज मैं आपको एक एसी जगह के बारे में बताता हूँ जहां बहुत सारी परियाँ रहा करती हैं यहाँ तक की मेरे बुलाने पर वो परियाँ यहाँ भी आ सकती हैं।‘’

जैसे ही महाराज ने यह सुना तो वह बड़े ही उत्साहित हो गए और बोले, “ये तो बड़ी प्रसन्नता की बात है परंतु इसके लिए मुझे क्या करना पड़ेगा?

जैसे ही रूपसेतु ने यह सुना तो उसने तुरंत महाराज से कहा की महाराज आप आज रात को तालाब के पास आ जाइएगा। मैं वहाँ पर परियों को नृत्य के लिए बुलवाऊंगा। राजा रूपसेतु की बात मान गए।

फिर रात होते ही राजा अपने घोड़े पर बैठे और तालाब की ओर चल दिये। वहाँ पास ही एक क़िला था जैसे ही राजा तालाब पर पहुंचे, उन्होंने देखा सामने के किले पर रूपसेतु उनका इंतजार कर रहा है।

राजा उसके पास गए तो रूपसेतु ने उनका स्वागत किया और बोला, “महाराज मैंने सारी व्यवस्था की है और सभी परियां किले के अंदर मौजूद हैं।”

जैसे ही राजा और रूपसेतु किले के अंदर जाने लगे, तब रूपसेतु को वहाँ पर उपस्थित सैनिकों ने गिरफ्तार कर लिया। राजा को यह देखकर आश्चर्य हुआ। राजा ने पूछा, “क्या चल रहा है? तुम सब रूपसेतु को गिरफ्तार क्यों कर रहे हो?”

तब तेनालीरामा जो किले के भीतर था और बोला, “महाराज मैं जनता हूँ की यहाँ क्या चल रहा है मैं आपको बताता हूँ।“

तेनाली ने कहा, “महाराज, यह रूपसेतु कोई यात्री नहीं है, यह एक देश जिसका नाम रूपदेश है उसका रक्षा मंत्री है। यह यहाँ आपको धोखे से मारने आया हुआ है। इस किले में कोई पारियाँ नहीं हैं यह तो इसकी एक चाल थी।“

तेनालीरामा की बातें सुनकर राजा ने उसे अपनी जान बचाने हेतु धन्यवाद दिया और पूछा, ‘’तुम्हें यह कैसे पता चला, तेनाली?’’

तब तेनाली बोला कि पहले दिन ही मुझे रूपसेतु पर शक हो गया था महाराज। उसके तुरंत बाद मैंने कुछ जासूसों को इसके पीछे लगा दिया था। तभी मुझे इसकी इस घिनौनी योजना का ज्ञान हुआ।

राजा कृष्णदेव तेनालीरामा से बड़े ही खुश हुए और राजा ने कहा की हम इसके लिए आपके सदा ही आभारी रहेंगे।

Tenali Rama Short Story से हमने क्या सीखा:

इस Tenali Rama Short Story से यह पता चलता है कि बिना जांच पड़ताल के कभी भी किसी पर भरोसा नहीं करना चाहिए। 

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *