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Tenali Rama Stories In Hindi With Moral – तेनाली को मृत्युदंड

Tenali Rama Stories - तेनाली को मृत्युदंड

Tenali Rama Stories In Hindi With Moral

तेनालीरामा की कहानी : तेनाली को मृत्युदंड

एक बार, बीजापुर नामक देश के सुल्तान अकबरुद्दीन को यह डर सताने लगा कि राजा कृष्णदेव उस पर हमला कर सकते हैं और उसके देश को जीत सकते हैं। सुल्तान ने कई राजाओं से सुना था कि राजा कृष्णदेव ने अपने साहस और पराक्रम बल पर कई देशों पर विजय प्राप्त की है और उन्हें अपने राज्य में मिला लिया है।

अपने राज्य को बचाने के लिए सुल्तान के मन में एक विचार आया। उसने सोचा कि यदि उसे अपना देश बचाना है, तो राजा कृष्णदेव को मारना होगा। लेकिन इसके लिए सुल्तान को एक ऐसा व्यक्ति चाहिए था, जो विजयनगर में जा कर राजा को मार सके। सुल्तान ने अपने मंत्रियों को बुलाया।

सुल्तान के सलाहकार ने कहा की महाराज ये कार्य तो सिर्फ कनरामू ही कर सकता है। क्योंकि वह तेनालीरामा का करीबी मित्र है। सुल्तान इस कार्य को तेनालीरामा के करीबी मित्र कनरामू को सौंपता है और उसे एक हजार सोने की मुद्रा इनाम में देता है।

इसके बाद कनरामू राजा की हत्या की योजना बना तेनालीरामा से मिलने के लिए विजयनगर को निकाल पड़ता है। तेनालीरामा लंबे समय से अपने दोस्त से नहीं मिला होता है, इसलिए जब वह कनरामू को विजयनगर में देखता है तो वो खुश हो जाता है और अपने घर में उसका अच्छे से आदर सत्कार करता है।

तेनालीरामा अपने दोस्त कनरामू की अच्छी सेवा करता है। तेनाली को इस बात की भनक भी नहीं लगती है की कनरामू विजयनगर में क्यों आया है।

कुछ दिन बीत जाने के बाद जब तेनालीरामा किसी काम के लिए घर से बाहर जाता है, तो कनरामू अपनी योजना अनुसार कृष्णदेव को तेनालीरामा की ओर से एक संदेश भेजता है कि यदि आप इस समय मेरे घर आए, तो मैं आपको कुछ अनोखा दिखाऊंगा। यह कुछ ऐसी चीज है जिसे आपने आजतक नहीं देखा होगा।

संदेश पढ़ने के बाद राजा की उत्सुकता बड़ जाती है की आखिर तेनाली आज एसी क्या विचित्र चीज दिखाने वाला है। यही सब सोचकर राजा तुरंत तेनालीरामा के घर पहुँचता है।

राजा कृष्णदेवराय जब भी तेनाली के घर के अंदर जाते थे तो वो कभी भी अपने साथ कोई हथियार नहीं रखते थे और सैनिकों को भी बाहर रहने का आदेश देते थे। जैसे ही राजा कृष्णदेवराय घर के अंदर घुसते हैं, तो राजा को अकेला पाकर कनरामू उनपर छुरे से हमला कर देता है।

लेकिन राजा चालाकी से कनरामू के हमले से बच जाते हैं और अपने सिपाहियों को बुलाते हैं। राजा की आवाज सुनते ही सैनिक वहाँ पहुँच जाते हैं और कनरामू को पकड़ लेते हैं।

कनरामू को महल ले जाया जाता है और उसे मृत्यु दंड दिया जाता है। लेकिन विजयनगर राज्य का एक नियम था कि जो भी राजा पर जानलेवा हमला करने वाले को आश्रय देगा उसको भी मृत्यु दंड दिया जाएगा।

इसलिए तेनालीरामा को भी मृत्यु दंड दिया जाता है। तेनालीरामा राजा से क्षमा मांगता है और उन्हे बताता है की वो निर्दोष है उसे दंड न दिया जाए।

लेकिन राजा कृष्णदेव कहते हैं, “तेनालीरामा मैं जनता हूँ तुम निर्दोष हो लेकिन मैं तुम्हारे लिए राज्य का कानून नहीं बदल सकता। तुमने कनरामू को अपने घर में रखा जिसने मुझे मरने की कोशिश की इसलिए मैं तुम्हें क्षमा नहीं कर सकता। लेकिन तुम किस प्रकार की मृत्यु चाहते हो। तुम्हें उसी तरह से मृत्यु दी जाएगी। बताओ तेनाली तुम किस प्रकार का मृत्युदंड चाहते हो।”

यह सुनकर तेनाली कहता है,” महाराज, मुझे बूढ़े की मौत चाहिए।” यह सुनकर सभी चौंक गए और राजा कृष्णदेव हंस पड़े और बोले,

” रामा , तुम अपनी बुद्धि से फिर बच गए।”
इस प्रकार तेनालीरामा अपनी बुद्धिमत्ता के कारण बच जाता है।

Tenali Rama Stories In Hindi With Moral से हमने क्या सीखा:

इस Tenali Rama Stories से यह पता चलता है कि स्थिति कैसी भी हो, हमें बस अपनी बुद्धि से काम करने की जरूरत है। हर समस्या का हल निकला जा सकता है।

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